March 8, 2021

बंद पड़ी खदानें जल संरक्षण के स्रोतों के रूप में की जाएंगी विकसित : CM बघेल

रायपुर।  छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया है कि बंद हो चुकी खदानों को जल-संरक्षण स्रोतों के रूप में विकसित करिए।  सीएम ने जल-संरक्षण के लिए कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।  सीएम ने खदानों में विभिन्न रोजगारमूलक गतिविधियों के संचालन को भी कार्य योजना में शामिल करने को कहा है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिलों में स्थित सभी ‘उपेक्षित खनन स्थलों’ का चिन्हांकन करें. उन्हें जल सरंक्षण स्त्रोत में परिवर्तित करें. आवश्यकतानुसार अन्य गतिविधियां आरम्भ करने की कार्ययोजना बनाएं. एक महीने के अन्दर रिपोर्ट तैयार कर पेश करें. इस कार्य में होने वाले व्यय की व्यवस्था नरेगा, डीएमएफ., सीएसआर, पर्यावरण और अधोसरंचना मद से आबंटन की जाएगी.

उन्होंने कहा है कि राज्य में दशकों से कोयला, लौह अयस्क, बाक्साइट, डोलोमाइट, लाइम स्टोन, मुरूम और गिट्टी खनन से कई खनिज भंडार समाप्त हो गए हैं. भंडार समाप्त होने के कारण खदानों को उपेक्षित हालत में छोड़ दिया गया है. ऐसे उपेक्षित (Abandoned) खनन स्थलों में आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं. जान-माल का नुकसान हो रहा है. खदानों को संरक्षित करने के लिए योजना तैयार करिए.

मुख्यमंत्री ने सूरजपुर जिले की केनापारा कोयला खदान का जिक्र किया. सीएम ने कहा कि 1991 से SECL ने कोयले का भंडार समाप्त होने के कारण खनन बंद कर दिया था. जिला प्रशासन एसईएसएल के सहयोग से उपेक्षित खदान का जीर्णोद्धार किया गया है. खदान को जल संरक्षण के उत्कृष्ट स्त्रोत में परिवर्तित कर दिया गया है.

सीएम ने कहा कि खदान में बोंटिग, फ्लोटिंग रेस्टोरेंट की सुविधा उपलब्ध कराई गई है. खदान में मत्स्य पालन जैसी गतिविधियां शुरू की गई है. आसपास के ग्रामीणों की आय वृद्धि के नये अवसर सृजित हुए हैं. सभी जिला कलेक्टरों से अपेक्षा व्यक्त की है. 1 अप्रैल 2021 के पहले उनके जिलों में स्थित खनन स्थलों का जीर्णोद्धार का कार्य आरम्भ किए जाने के लिए निर्देश दिए हैं. बारिश से पहले काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं. ताकि खदानों में जल संरक्षण किया जा सके. 

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