October 28, 2020

सीएम शिवराज को ठंडा खाना खिलाने पर अफसर की गई नौकरी, राजनीति तेज हुई तो किया बहाल

इंदौर।  मध्य प्रदेश के इंदौर में मुख्यमंत्री शिवराज के प्रोटोकॉल के पालन में लापरवाही बरतने के कारण खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के खाद्य निरीक्षक मनीष स्वामी को निलंबित कर दिया। मामला शिवराज के दौरे से जुडा हुआ है। अफसर के खिलाफ उक्त कार्रवाई इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह ने की। बाद में इस मामले ने तूल पकड़ लिया और सियासत शुरू हो गई। जिसके बाद सीएम के हस्तक्षेप से दोबारा निलंबित अफसर को बहाल कर दिया गया है।

दरअसल, मुख्यमंत्री जब कहीं दौरे पर आते हैं तो उनके स्टाफ सहित कई व्यक्तियों के भोजन की व्यवस्था प्रोटोकॉल के अंतर्गत की जाती है. इसमें चूक हुई. एक तो भोजन विलंब से पहुंचा और फिर जब पहुंचा तो उसकी क्वॉलिटी खराब थी.

इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर के द्वारा कार्रवाई की गई है लेकिन अधिकारी इसे बस प्रोटोकॉल तोड़ने की बात कह रहे हैं. कलेक्टर ने कहा प्रोटोकॉल के तहत सीएम के लिए जिस क्वाॉलिटी का खाना होना चाहिए था, उसमें चूक की गई. खाना पैक करते समय पूरे प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया. 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 23 सितम्बर को इंदौर आए थे. इंदौर दौरे के दौरान उनके खाने में हुई चूक खाद्य और औषधि प्रशासन विभाग के निरीक्षक मनीष स्वामी को महंगी पड़ गई. सीएम के प्रोटोकॉल में लापरवाही बरतने पर कलेक्टर मनीष सिंह ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. बाद में मुख्यमंत्री ने खाद्य सुरक्षा अधिकारी को बहाल करने के निर्देश जिला प्रशासन को दिए हैं. निर्देशों के पालन के क्रम में कलेक्टर मनीष सिंह ने सस्पेंड किए गए खाद्य सुरक्षा अधिकारी मनीष स्वामी को बहाल कर दिया है. 

बता दें कि इंदौर के विधानसभा क्षेत्र तीन में 50 करोड़ के विकास कार्यों का भूमिपूजन करने सीएम पहुंचे थे. इससे पहले वे बुरहानपुर जिले के नेपानगर विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर थे. इस वजह से सीएम यहां आने में दो घंटे लेट हो गए. उन्हें शाम सवा 6 बजे यहां पहुंचना था लेकिन वे रात सवा 8 बजे इंदौर पहुंचे थे. दो घंटे की देरी के कारण खाने में गड़बड़ी हुई. रात होने और खराब मौसम के कारण उन्होंने हेलिकॉप्टर के बजाय कार से भोपाल जाने का फैसला किया. लगातार कार्यक्रमों की वजह से मुख्यमंत्री खाना नहीं खा पाए थे. इसलिए उन्होंने खाना पैक कर गाड़ी में रखने के निर्देश कलेक्टर को दिए थे.

खाद्य निरीक्षक मनीष स्वामी ने सफाई देते हुए कहा था कि कलेक्टर मनीष सिंह के निर्देश पर सीएम के पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के समय के मुताबिक खाना शाम 6 बजे ही बनवा लिया गया था. लेकिन सीएम दो घंटे लेट हो गए और वे रात नौ बजे के बाद यानि तीन घंटे बाद इंदौर से रवाना हो पाए. मैंने दूसरा खाना भी बनवाया था पर वो सड़क मार्ग से भोपाल गये थे. मैंने भोजन अच्छे से पैक किया था, सिर्फ रोटी ठंडी हुई थी, बाकी खाना गरम ही था. मुख्यमंत्री जी की गाड़ी में AC चल रहा था. साथ ही मौसम ठंडा होने के कारण रोटियां ठंडी हो गईं. सिल्वर फॉइल में खाना पैक किया था लेकिन फिर भी खाना ठंडा हो गया और रोटियां सख्त हो गई थीं. बाद में मेरे पास वरिष्ठ अफसर का खाने को लेकर फोन आया और 24 सितंबर को वॉट्सऐप पर सस्पेंशन का आदेश आ गया.

खाद्य सुरक्षा अधिकारी मनीष स्वामी करीब 10 साल से इंदौर में ही पदस्थ थे. वे चहेते अफसर माने जाते हैं. प्रदेश में सत्ता बदलने और कांग्रेस की सरकार आने के बावजूद उन्हें कोई हिला नहीं सका. कई बार मनीष स्वामी की शिकायतें भी हुईं लेकिन कोई उन्हें हिला नहीं सका. अब मुख्यमंत्री के खाने में चूक उन्हें बचा नहीं पाई. स्वामी पिछले कई सालों से इंदौर में ही पदस्थ हैं. उन्होंने यहां पर मिलावट करने वालों और राजनेताओं के साथ मिलकर एक ऐसा गठजोड़ बना लिया है कि उसके बाद में उनके खिलाफ कभी कोई कार्रवाई नहीं कर पाता है. यह पहला मौका है जब मनीष स्वामी के खिलाफ सीधे कार्रवाई की गई है.

एडीएम अभय बेडेकर ने बताया कि मुख्यमंत्री जी का दौरा था, मनीष की वहां कलेक्टर सर के आदेश से ड्यूटी लगाई थी. उससे प्रोटोकॉल में चूक हुई थी. किसी भी कर्मचारी को, जिसकी वीवीआईपी में ड्यूटी लगती है, उसे बहुत ध्यान रखना पड़ता है. इस बार इनसे चूक हुई, इसलिये कार्रवाई की है. ये सब कर्मचारियों के लिए चेतावनी है.

वहीं इस मामले में राजनीति भी तेज हो गई थी. पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने सीएम शिवराज सिंह को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि आप अपने आप को किसान पुत्र कहते हैं, आप के राज में कई लोग भूखे सो जाते हैं, आपने एक अधिकारी को इसलिए सस्पेंड कर दिया कि खाना थोड़ा ठंडा था, मुझे शर्म आती है आप पर. 

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