December 3, 2021

नहीं होंगे थोक तबादले : CM भूपेश बघेल ने लगाई ब्रेक, मानसून सत्र में मुद्दा उठाने की तैयारी में BJP

रायपुर।  छत्तीसगढ़ सरकार ने इस साल भी प्रदेश में अधिकारियों और कर्मचारियों के ट्रांसफर (transfer in chhattisgarh )पर रोक लगा रखी है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (cm bhupesh baghel) ने कह दिया है कि बड़े पैमाने पर ट्रांसफर इस साल भी नहीं होंगे. कोरोना के कारण इस साल भी बड़े पैमाने पर तबादलों पर रोक जारी रहेगी. हालांकि समन्वय के आधार पर विभिन्न विभागों में तबादला जारी है. इधर बीजेपी ने सरकार के इस फैसले पर विरोध जताया है. बीजेपी का कहना है कि ट्रांसफर पर ऑफिशयली भले ही रोक लगी है लेकिन पैसे की आड़ में ट्रांसफर किए जा रहे हैं. बीजेपी ने विधानसभा के मानसून सत्र में ‘तबादला उद्योग’ का मुद्दा उठाने का मन बनाया है.

अप्रैल 2020 की स्थिति में छत्तीसगढ़ में कुल 5 लाख 14 हजार से ज्यादा शासकीय अधिकारी और कर्मचारी हैं. जिनमें से हजारों जरूरतमंद अधिकारी और कर्मचारियों ने अपनी मनपसंद जाने के लिए संबंधित विभागों में तबादला की अर्जी लगा रखी है. लेकिन उन्हें इस साल भी अपनी मनपसंद जगह नहीं मिल पाएगी, पिछले साल की तरह इस साल भी ना तो ट्रांसफर नीति आएगी और न ही तबादले होंगे. सीएम भूपेश बघेल ने साफ कर दिया है कि कोरोना काल में ट्रांसफर उचित नहीं है.

तबादले पर रोक के आदेश के बाद इस साल तबादले की राह देख रहे अधिकारियों और कर्मचारियों में काफी मायूसी है. खासकर वे अधिकारी और कर्मचारी जिन्होंने किसी न किसी परेशानी की वजह से विभिन्न विभागों में तबादले की अर्जी लगा रखी है. जिनकी सुनवाई शायद इस वर्ष भी नहीं होगी.

इस पूरे मामले में तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष विजय झा (State President of Third Class Employees Union Vijay Jha) ने अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि बल्क तबादला पर रोक लगी रहनी चाहिए. लेकिन जरूरतमंद अधिकारी और कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जाना चाहिए.

झा ने कहा कि बल्क तबादला होने से उसमें बहुत ज्यादा राजनीति हो जाती है. नेतागिरी के चक्कर में जरूरतमंद के साथ न्याय नहीं हो पाता और कुछ अधिकारी-कर्मचारी प्रताड़ित भी होते हैं. साथ ही कमीशन खोरी का भी खेल शुरू होने का डर बना रहता है. झा ने सरकार से मांग की है कि जो अधिकारी व कर्मचारी किसी कारणवश या परेशानी के चलते एक स्थान से दूसरे स्थान जाना चाहते हैं. उन जरूरतमंद अधिकारियों-कर्मचारियों का तबादला किया जाना चाहिए.

विजय झा ने बताया कि जब विभाग की तरफ से किसी अधिकारी या कर्मचारी का तबादला किया जाता है तो उसके लिए उसे एक जगह से दूसरी जगह जाने में होने वाला सारा खर्च संबंधित विभाग ही उठाता है. इस तरह यह खर्च अलग अलग श्रेणी के लिए अलग-अलग होता है. उदाहरण के लिए बाबू के लिए जहां एक और ढाई से तीन हजार रुपये का खर्च तबादले पर आता है तो वहीं दूसरी ओर अधिकारी के लिए 20 से 25 हजार रुपये विभाग को देना पड़ता है. यदि कोई व्यक्ति स्वयं के व्यय से तबादला चाहता है तो उस स्थिति में सरकार पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ता है. ऐसे में जो जरूरतमंद अधिकारी और कर्मचारी स्वयं के व्यय पर तबादला चाहते हैं तो उनका तबादला किया जाना चाहिए. इससे ना सरकार पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और जरूरतमंद लोग अपनी मनचाही जगह भी पहुंच जाएंगे.

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