May 15, 2021

फटी जींस पर उत्तराखंड के CM ने मांगी माफी : बोले- मैंने संस्कारों के बारे में बात की थी, किसी का दिल दुखा हो तो माफी मांगता हूं

देहरादून। उत्तराखंड के नए सीएम तीरथ सिंह रावत के फटी जींस पर दिए बयान के बाद जब पूरे देश भर में बवाल मचना शुरू हुआ तो इसे थामने के लिए शुक्रवार शाम उन्हें इस पर माफी मांगनी पड़ी। उन्होंने कहा कि ये बयान संस्कारों को लेकर था। अगर किसी को फटी जींस पहननी ही है तो वह पहने। उनके बयान से किसी का दिल दुखा है तो वह उसके लिए माफी मांगते हैं।

तीरथ सिंह रावत ने मंगलवार को देहरादून में एक वर्कशॉप में महिलाओं के रिप्‍ड जींस पहनने पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने अपने बयान में कहा था, “आजकल महिलाएं भी फटी जींस पहनती हैं। उनके घुटने दिखते हैं, ये कैसे संस्कार हैं? ये संस्कार कहां से आ रहे हैं। इससे बच्चे क्या सीख रहे हैं और महिलाएं आखिर समाज को क्या संदेश देना चाहती हैं। फटी जींस हमारे समाज के टूटने का मार्ग प्रशस्त कर रही है। इससे हम बच्चों को बुरे उदाहरण दे रहे हैं, जो उन्हें नशीले पदार्थों के सेवन की ओर लेकर जाते हैं। अब हम अपने बच्चों को ‘कैंची से संस्कार’ दे रहे हैं।”

अपने बेतुके बोलों के लिए सोशल मीडिया पर निशाना बन रहे CM तीरथ पार्टी में बेहद संयमित और वफादार कार्यकर्ता के तौर पर जाने जाते हैं। तीरथ ने विद्यार्थी परिषद के दिनों की अपनी सहयोगी और मिस मेरठ रहीं रश्मी से इंटरकास्ट मैरेज की है। रश्मी के मुताबिक, ‘तीरथ जी बेहद सादगी पसंद और खुले विचार के इंसान हैं।’ मौजूदा विवाद के बारे में वे कहती हैं कि मीडिया उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है।

तीरथ सिंह रावत का जन्म पौड़ी के सीरों गांव में कलम सिंह रावत और गौरा देवी के घर 9 अप्रैल,1964 को हुआ। भाइयों में सबसे छोटे तीरथ किशोरावस्था में ही RSS से जुड़ गए थे। अपने कस्बे जहरीखाल में शाखा लगाते-लगाते वे महज 20 साल की उम्र में संघ के प्रांत प्रचारक बन गए। 1983 से 1988 तक संघ के प्रचारक के तौर पर काम करने के बाद उन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) में भेज दिया गया।

समाजशास्त्र से MA तीरथ सिंह रावत 1992 में हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय, गढ़वाल के छात्र संघ अध्यक्ष भी रहे। इसके बाद वह ABVP के प्रदेश उपाध्यक्ष बने और उनके कदम सक्रिय संसदीय राजनीति की ओर बढ़ गए। इस दौरान वह राम मंदिर से लेकर उत्तराखंड आंदोलन में भी सक्रिय रहे। राम मंदिर आंदोलन के दौरान तीरथ को दो महीने जेल में भी रहना पड़ा था।

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