होली पर्व : हिरण्यकश्यप की तपस्या भंग कर ब्रह्मा ने दिया था ऐसा वरदान

हिरण्यकश्यप ने दिया स्वयं की पूजा का आदेश : वरदान पाकर वह शक्तिशाली हो गया और अपनी शक्ति का दुरुपयोग करने लगा। हिरण्यकश्यप ने इंद्र का राज्य छीन लिया और तीनों लोकों में उपद्रव मचाने लगा। उसने अपने राज्य में भगवान विष्णु की पूजा पर प्रतिबंध लगा दिया और आदेश दिया कि लोग मुझे भगवान मानकर मेरी पूजा करें, लेकिन हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद परम विष्णु भक्त था। उसने अपने पुत्र प्रह्लाद को विष्णु भक्ति बंद करने के लिए काफी समझाया, लेकिन प्रह्लाद की विष्णु भक्ति जारी रही। काफी प्रताड़ना देने के बाद भी जब प्रह्लाद की विष्णुभक्ति बंद नहीं हुई तो उसने अपनी बहन होलिका को बुलवाया। होलिका को अग्नि में न जलने का वरदान प्राप्त था। हिरण्यकश्यप के आदेश से होलिका प्रह्लाद को होली में लेकर बैठ गई। लेकिन प्रह्लाद की विष्णुभक्ति की वजह से होली तो अग्नि में जलकर खाक हो गई और प्रह्लाद सकुशल धधकती अग्नि से बाहर आ गया। यह घटना फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि को हुई थी इसलिए इस दिन होली का पर्व मनाया जाता है।